Kirti Dhariwal
कहाँ गए वो बचपन के साथी हो तुम
ओ मुरली वाले इतना तो बता दो तुम
इस टूटी हुई डोर को फिर से जोड़ लो तुम
कान्हा की दिवानी को दर्शन करा लो तुम
गोकुल के राजा अपना राज़ बता लो तुम
जब तक न मिलोगे आस न तोड़ो तुम
आँसू के मोती नैनों से उठा लो तुम
अपनी कुटिया फिर से घुमा लो तुम
Mere Kanha Teri Raho Me
Is Dukhiyare Man Ki Pyaas Bujhao Tum