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Kab Yaad Me Tera Saath Nahi | Faiz Ahmed Faiz

Pratidin Ek Kavita

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Episode  ·  2:21  ·  Feb 13, 2026

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कब याद में तेरा साथ नहीं । फ़ैज़ अहमद फ़ैज़कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहींसद-शुक्र कि अपनी रातों में अब हिज्र की कोई रात नहींमुश्किल हैं अगर हालात वहाँ दिल बेच आएँ जाँ दे आएँदिल वालो कूचा-ए-जानाँ में क्या ऐसे भी हालात नहींजिस धज से कोई मक़्तल में गया वो शान सलामत रहती हैये जान तो आनी जानी है इस जाँ की तो कोई बात नहींमैदान-ए-वफ़ा दरबार नहीं याँ नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँआशिक़ तो किसी का नाम नहीं कुछ इश्क़ किसी की ज़ात नहींगर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसागर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं

2m 21s  ·  Feb 13, 2026

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