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इस जनम में । राजुला शाहअचरज हो तुमएक दु:स्वप्न से जगकमरे मेंअलस्सुबहपरदे उड़ाते आतीहवा-सा अचरज।इसके आगे मगरमुझे कुछ याद नहींजगता हूँ तो स्वप्न भुला जाता हैसोता हूँ तो यह संसारजाने कहाँ बिला जाता हैकभी यही भूल जाता हूँकि जागा हूँ या सो रहाफिर भीइस जनम मेंतुमसे हीबाकी सबअपनी जगह पर हैइसलिएमैं कहीं भी रहूँतुम यहीं रहनामैं कुछ भी कहूँतुम यही कहनामैं हूँमैं रहूँगी।
1m 38s · Feb 17, 2026
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