Viraasat (विरासत)

Ashwani Kapoor Ki Kalam Se

Episode   ·  9 Plays

Episode   ·  9 Plays  ·  2:59  ·  Aug 7, 2020

About

विश्वास नहीं होता मेरी आँखों को कि नीले आसमान से ढकी यह मेरी दिल्ली है ! ये तो मेरे बचपन का कोई सपना जान पड़ता है ! मैंने कब के बीत चुके बचपन में ही देखा था यही नीला आसमान! मेरे बचपन में चाँद- तारों से भरी चादर ओढ़कर यही नीला आसमान रात भर सकून देता था मेरे मन को ! रात के स्याह अंधेरे से कभी डर भी नहीं लगता था ! याद है अब भी मुझे चाँद तारों की रोशनी में घर - मोहल्ले में की धमाचौकड़ी, छुटपन की ढेर - सी शरारतें ! कभी कहा नहीं था माँ  या बाबूजी ने कि ‘बाहर न जा , अंधेरा है ! ‘ वही दिन क्या लौट आए हैं ? आसमान फिर से नीला हो गया है रात चाँद तारों की बारात लिए अब रोज़ आती है ! पर ये क्या ? बच्चों की किलकारियाँ कहीं दूर तक सुनाई नहीं पड़ती ! इतना ख़ुशनुमा माहौल है लेकिन सूनापन क्यों छाया है चारों तरफ़ ? बड़ा भयावह लगता है रात का अंधेरा अब ! हर ओर डर का पहरा है ! ये क्या हो गया है ? सब कुछ पहले जैसा है फिर भी ख़ौफ़ क्यों है चारों तरफ़ ? मैं विरासत में ये क्या सौंप रहा हूँ अपने ही नए रूप को ! मेरे नाती -पोते क्या मेरे नए रूप में यही दिन देखने को आए हैं ? मुझे आगे बढ़कर कुछ करना होगा , मुझे ही नहीं हम सबको अब सोच बदलनी होगी! इस नीले आसमान को भी नीला ही रहना होगा इस चाँदनी रात को यूँ ही जगमगाना होगा ! —- यह होड़ की दौड़ मुझे रोकनी होगी ! तरक़्क़ी के साथ -साथ मुझे जीने की नई राह खोजनी होगी ! मुझे चाँद-तारों और नीले आसमान को यहीं टिके रहने को विवश करना होगा ! मुझे विरासत में अपने बचपन का आसमान ही अपनी नई पीढ़ी को सौंपना होगा ! —-अश्विनी कपूर

2m 59s  ·  Aug 7, 2020

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